Monday, 25 November 2019

श्री राम रचित मानस।

गोस्वामी तुलसीदास जी के नीतिपरक एवं भक्तिपूर्ण दोहे....
१-मंगल भवन अमंगल हारी,
    द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी।

२-बिनु सत्संग विवेक न होई,
   राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।

३-कर्म प्रधान विश्व रचि राखा ,
   जो जस करहिं सो तस फल चाखा।

४-जो परनारि लीलार गोसाईं,
    तजउ चौथि के चंद कि नाईं।

५-सीयराम मय सब जग जानी,
    करहुं प्रणाम जोरि जुग‌ पानी।।

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